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सोमवार, 27 मार्च 2017

राज्यपाल तथा उसकी अधिकार और कार्य

हेल्लो दोस्त गुड इवनिंग इससे पिछले वाले पोस्ट में हमने जाना की प्रधानमंत्री और प्रधानमंत्री के शक्तियों के बारे में जाना आज हम राज्यपाल के बारे में जानेंगे अगर आप मेरे इस पोस्ट को पूरा पढ़ लेंगे तो आप को समझ में आ जाएगा कि राज्यपाल किसी कहते है और राज्य पाल की शक्तियां किया होती है । तो चलिए सबसे पहले जानते राज्यपाल होता है क्या।
राज्यपाल(governor) - भारतीय संविधान के अनुच्छेद 153 के अनुसार राज्य के लिए एक राज्यपाल की व्यवस्था की गयी है। राज्यपाल राज्य का सर्वाच्च संवैधानिक अधिकारी होता है। राज्य प्रशासन के सभी कार्य उसी के नाम से सम्पादित किये जाते है ।संविधान के अनुच्छेद 154 में कहा गया है कि " राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित होगी और वह इसका प्रयोग संविधान  के अनुसार या तो स्वयं या अपने अधीनस्थ पदाधिकारियों द्वारा करेगा।"
राज्यपाल की नियुक्ति- संविधान के अनुच्छेद 155 के अनुसार राज्य में राज्यपाल की नियुक्ति रास्ट्रपति द्वारा की जाती है किन्तु वास्तव में राज्यपाल की नियुक्ति केंद्रीय मंत्रिपरिषद की सलाह पर राष्ट्रपति करते है।
कार्यकाल -राज्यपाल संविधान के अनुच्छेद 156 के अनुसार रास्ट्रपति के प्रासादपर्यन्त अपना पद धारण करेगा ,मतलब राज्यपाल उसी समय तक अपने पद पर कार्य कर सकता है ,जब तक उसे रास्ट्रपति का विस्वास प्रॉप्त हो। राज्यपाल की नियुक्ति पाँच वर्षो के लिए की जाती है , किन्तु इस अवधि के पूर्व भी राज्यपाल अपना त्याग पत्र रास्ट्रपति को देकर अपने पद से मुक्त हो सकता है।
राज्यपाल पद के लिए योग्यताए -राज्यपाल पद पर वही चुना जा सकता है जो।
1- 35 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो।
2- भारत का नागरिक हो ।
3- संघ अथवा राज्य में कोई लाभ का पद न धारण करता हो।
4- वह संघ अथवा राज्य की व्यवस्थापिका का सदस्य न हो।
वेतन तथा भत्ते- राज्यपाल का वेतन एक लाख दस हजार रुपया प्रतिमाह है। राज्यपाल के कार्यकाल में उसके वेतन ,भत्ते एव अन्य सुविधाओं में किसी प्रकार की कटौती नहीं की जा सकती। सविधान के अनुसार एक ही व्यक्ति दो या दो से अधिक राज्यो का राजपाल नियुक्त किया जा सकता है ।
राज्यपाल के अधिकार एव कार्य -राज्यपाल की शक्तियां एवं अधिकार निम्न है।
1-कार्यपालिका सम्बन्धी अधिकार-(i) राज्यपाल संविधान के अनुच्छेद 164 के अनुसार विधानसभा में बहुमत प्रॉप्त दल के नेता को मुख्यमंत्री नियुक्त करता है और मुख्यमंत्री की सलाह पर अन्य मंत्रियो की नियुक्ति करता है।
(ii)- राज्यपाल राज्य के महाधिवक्ता , लोमसेवा आयोग के अध्यक्ष, सदस्य राज्य के कतिपय अन्य उच्चाधिकारियों की नियुक्ति करता है।
(iii)- राज्य सूची के विषयों पर अध्यादेश जारी करता है ।उल्लेखनीय है कि राज्यपाल अपनी कार्यपालिकिया शक्तियों का प्रयोग मुख्यमंत्री की सलाह पर करता है।
(iv)- वह मुख्यमंत्री से शासन सम्बन्धी सभी विषयों की जानकारी प्राप्त करता है।
2-
विधायी शक्तियां (i)- राज्यपाल विधानसभा  का अधिवेशन बुला सकता है तथा स्थगित भी कर सकता है ।
(ii)- राज्यपाल विधानपरिषद में सम्पूर्ण सदस्य सँख्या का 1/6 भाग मनोनीत करता है।
(iii) - राज्य विधानमण्डल द्वारा पारित विधेयक राज्यपाल के हस्ताक्षरोपरान्त ही क़ानून के रूप में विधिक मान्यता प्राप्त करता है।
(iv)- विधानसभा के चुनाव में आंग्ला भारतीय समुदाय को उचित प्रतिनिधित्व न मिलने पर राज्यपाल उस समुदाय के एक व्यक्ति को विधानसभा का सदस्य मनोनीत कर सकता है।
3-वित्तीय अधिकार-(i)-राज्यपाल प्रत्येक वित्तीय वर्ष के आरम्भ में वार्षिक आय व्यय का बजट विधानमण्डल के समक्ष रखवाता है।
(ii)- राज्यपाल की अनुमति से धन विधेयक विधान सभा में प्रस्तुत किया जाता है।
(iii)- राज्य सरकार की आकस्मिक निधि पर राज्यपाल नियंत्रण होता है।
4-न्यायिक अधिकार-(i)- वह उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति में राष्ट्रपति महोदय को परामर्श देते है।
(ii)- वह जिला जजो की नियुक्ति व प्रोन्नति उच्च न्यायालय के परामर्श से करता है।
(iii)- वह विधानमण्डल द्वारा निर्मित कानूनों को भंग करनेवालों को दण्डित होने पर क्षमादान प्रदान कर सकता है या दण्ड को स्थगित कर सकता है या कम कर सकता है।
अन्य शक्तियां(i) वह राज्य लोक सेवा आयोग का वार्षिक प्रतिवेदन और राज्य की आय व्यय के सम्बन्ध में महालेखा परीक्षक का प्रतिवेदन प्रॉप्त करता है और उन्हे विधानमण्डल के समक्ष रखता है।
(ii)-अनुच्छेद 356 के अनुसार यदि राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू है तो वह रास्ट्रपति के प्रतिनिधि के रूप मेशासन करता है।


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