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रविवार, 26 मार्च 2017

प्रधानमंन्त्री और प्रधानमंन्त्री के अधिकार एवं कार्य

हैल्लो दोस्तों आप सब कैसे है दोस्तों  आज हम जिसके बारे में जानेंगे कोई आप व्यक्ति नहीं बल्कि अपने देश के प्रधानमन्त्री के बारे में जानेंगे की और इस पोस्ट में ये भी जानेंगे की प्रधानमन्त्री बनते कैसे है और प्रधानमन्त्री के अधिकार क्या क्या होते है और कार्य क्या होता एक प्रधानमन्त्री का ओके दोस्तों चलिए जानते है इन सब के बारे में अगर आप मेरे पोस्ट को अच्छे से पढ़ लेगें तो आप इन सारी बातों को आप जान जायेगा।
प्रधानमन्त्री - संसदीय शासन प्रणाली में प्रधानमन्त्री का पद सर्वाधिक महत्वपूर्ण और शक्तिशाली होता है।क्योंकि वास्तवीक कार्यपालिका शक्ति उसी हाथ में निहित होती है ।भारतीय संविधान का अनुच्छेद 74 प्रधानमन्त्री पद की व्यवस्था करता है ।संवीधन में यह है कि प्रधानमन्त्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करेगा किन्तु व्यवहार में इस क्षेत्र में में राष्ट्रपति की शक्ति नगण्य है। इसलिये लोकसभा के बहुमत दल के नेता को ही प्रधानमन्त्री के पद पर नियुक्त करता है। किसी दल को लोकसभा में बहुमत न प्रॉप्त होने की स्थिति में वह उस व्यक्ति को प्रधानमंत्री पद पर नियुक्त करता है, जिसे लोकसभा का बहुमत प्रॉप्त हो। यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि प्रधानमन्त्री संसद के किसी भी सदन का सदस्य हो सकता है ।श्रीमती इन्दिरा गांधी पहली बार प्रधानमन्त्री का पद ग्रहण करते समय राज्यसभा की ही सदस्य थी। ऐसे भी व्यक्ति प्रधानमन्त्री की सपथ ग्रहण कर सकते है , जो किसी भी सदन के सदस्य नहीं है जैसे श्री पि०वी० नरसिम्हा राव और एच० डी० देवगौण। ऐसे व्यक्ति को प्रधानमन्त्री बनने पर 6 माह के किस न किसी सदन की सदस्यता ग्रहण करनी होगी।
         प्रधानमन्त्री के अधिकार एवं कार्य-
लोकसभा का नेतृत्व करना -प्रधानमन्त्री लोकसभा में बहुमत प्रॉप्त दल का नेता होता है, अतः सदन में सरकार की महत्त्वपूर्ण नितियो की घोषणा करता है तथा सदन में अपने सहयोगी मन्त्रियों द्वारा दिए गये भाषणों का स्पष्टीकरण करता है। प्रधानमन्त्री राष्ट्रपति को लोकसभा भंग करने की सलाह भी दे सकता है।
मन्त्रीपरिषद का निर्माण -प्रधानमन्त्री मन्त्रीपरिषद का वास्तवीक निर्माता है। उसी की सलाह पर राष्ट्रपति अन्य मन्त्रियों की नियुक्ति करता है तथा उनमे विभागों का बंटवारा करता है। प्रधानमन्त्री अपने मन्त्रिपरिषद  के किसी मंत्री से त्याग पत्र मांग सकता है या मन्त्रियों के विभागों में फेर बदल कर सकता है तथा स्वयं त्याग पत्र देकर मन्त्रिपरिषद का जीवन अंत कर सकता है।
मंत्रिमण्डल की बैठकों का अध्यक्ष-प्रधानमन्त्री मन्त्रिपरिषद अथवा मंत्रिमण्डल का अध्यक्ष होता है ,अतः मंत्रीमण्डल की समस्त बैठकों की अध्यक्षता करता है।
मन्त्रिपरिषद और राष्ट्रपति के बीच की कड़ी-प्रधानमन्त्री राष्ट्रपति के विचारों को मन्त्रिपरिषद तक पहुचाता है और मन्त्रिपरिषद के निर्णयों की सूचना राष्ट्रपति को  देता है । इस प्रकार वह राष्ट्रपति और मन्त्रिपरिषद के बीच वीचार विनिमय के कड़ी के रूप में काम करता है।
राष्ट्र का प्रधान नायक- प्रधानमंत्री राष्ट्र का प्रधान नायक होता है। वह देश विदेश में सरकार की नीति का प्रमुख प्रवक्ता होता है ।वह मुखिया के रूप में देश के शासन का संचालन करता है । इसके अतिरिक्त प्रधानमन्त्री निम्नलिखित कार्य भी करता है।
1- शासन के विभिन्न भागों में समन्वय स्थापित करता है ।
2- उपाधियां प्रदान करता है जैसे भारत रत्न, पदम् विभूषण, पदम् भूषण,आदि।
3- अन्तर्राष्ट्रीय क्षेत्रो में भारत का प्रतिनिधत्व करता है।
4- शासन का प्रमुख प्रवक्ता होता है।
5- प्रधानमन्त्री देश का सर्वाच्च नेता होता है।
6- लोकसभा का आम चुनाव सामान्यतः प्रधानमन्त्री का चुनाव ही होता है।
नोट-संवीधन प्रधानमंन्त्री को प्रशासनिक मशीनरी में एक विशेष स्थान प्रदान करता है ।वह केवल मन्त्रिपरिषद का अध्यक्ष ही नही, वरन राष्ट्रपति का मुख्य परामश दाता भी है ।उसकी उच्च स्थिति के कारण उसका या दायित्व हो जाता है कि वह देखे की मन्त्रिपरिषद एक टीम की भांति कार्य कर रही है या नही।

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